आग से अंतरिक्ष तक : मानव-जाति की वैज्ञानिक पहुँच

जिज्ञासा, मानव मन की सहज प्रवृत्ति है तथा प्रश्न करना, सत्य जानने की दिशा में मानव-जाति का पहला कदम है। यदि आप में सत्य जानने की जिज्ञासा है या आपके मन में भी कहीं-न-कहीं बहुत-से प्रश्न हैं तो निश्चित ही यह पुस्तक आपके लिए रोचक और उपयोगी सिद्ध होगी, क्योंकि प्रस्तुत पुस्तक मानव मन के अधिकतम प्रश्नों के उत्तर देने का प्रयास करती है जिनमें से कुछ प्रश्न संतुष्ट हो जाते हैं तो वहीं कुछ नए प्रश्न मानव मन में अपनी जगह बना लेते हैं।

लोकप्रिय विज्ञान श्रेणी के अंतर्गत प्रस्तुत पुस्तक मानव-जाति की पहली वैज्ञानिक उपलब्धि : आग की खोज से लेकर भविष्य में मानव-जाति के अंतरिक्ष में बसने के सपने या आवश्यकता पूर्ति की कहानी कहती है, इसलिए इस पुस्तक का नाम ‘आग से अंतरिक्ष तक : मानव-जाति की वैज्ञानिक पहुँच’ है।

मानव-जाति के अब तक के सम्पूर्ण इतिहास को बूझने पर ज्ञात होता है कि हम ने अब तक क्या-क्या खोया और विकल्पों के रूप में क्या पाया है। विकास के इस क्रम को जानने से यह भी ज्ञात होता है कि साथ-ही-साथ विज्ञान ने भी अपना विकास किया है जिससे कि विज्ञान के सहजबोध, विधियों, पद्धति, कार्यशैलियों, दर्शन तथा अभिधारणाओं में बड़े परिवर्तन परिलक्षित होते हैं। ‘हम किस गली जा रहे हैं...’ अध्याय में कला प्रधान समाज, दर्शन प्रधान समाज तथा विज्ञान प्रधान समाज के स्वरूपों पर एक दार्शनिक चर्चा की गई है जिससे कि मनुष्य और विज्ञान की आगामी विकास यात्रा को भटकाव रहित व्यापक दृष्टि और दिशा मिल सके।

विषयानुक्रम
भूमिका
पहला खंड.    सत्य : तेरे अनेक रूप
दूसरा खंड.    विज्ञान का उद्भव कब हुआ?
विज्ञान और उसकी प्रकृति : ज्ञान और विज्ञान; विज्ञान और धर्म; विज्ञान और कला; विज्ञान और दर्शन; विज्ञान और तकनीक; विज्ञान और विज्ञान की शाखाएँ; विज्ञान और वैज्ञानिक दृष्टिकोण
वैज्ञानिक विधियों का विकास : प्रयोग की रूपरेखा
विज्ञान की प्रमुख अभिधारणाएँ : विज्ञान और छद्म विज्ञान
प्रमाण प्रस्तुत करने के तरीके
तीसरा खंड.   गणित, विज्ञान की महज एक भाषा
आओ, अनंत को परिभाषित करें।
प्रायिकता एक गणितीय अवधारणा
चौथा खंड.    विज्ञान और वैश्विक समाज
विज्ञान उद्देशिका
विज्ञान जगत में : हमारे अधिकार
विज्ञान के विकास में : हमारे कर्तव्य
पाँचवाँ खंड.   वैश्विक समाज की बाधा
छठवाँ खंड.    हम किस गली जा रहे हैं...
परिशिष्ट.     संक्षिप्तीकरण; वैज्ञानिक शब्दावली; संदर्भ-सूची; अनुक्रमणिका

लेखक : अज़ीज़ राय
प्रकाशक : सेतु प्रकाशन पिट्सबर्ग, पैंसिल्वेनिया संयुक्त राज्य अमेरिका (setuhindi@gmail.com)
आवरण संयोजन एवं चित्रांकन : कुमार अमित
विषय : लोकप्रिय विज्ञान (Popular Science), #AagSeAntarikshTak
आईएसबीएन : 978-1-947403-05-5
ऑनलाइन खरीद : https://amzn.to/2NQNMui

प्रस्तुत पुस्तक मानव-जाति की पहली वैज्ञानिक उपलब्धि आग की खोज से लेकर भविष्य में मानव-जाति के अंतरिक्ष में बसने के सपने या आवश्यकता पूर्ति की कहानी कहती है, इसलिए इस पुस्तक का नाम ‘आग से अंतरिक्ष तक’ रखा है।

प्रकृति के स्वरूप, ज्ञान-सृजन के विचारों, प्रयुक्त विधियों, प्रमाण के तत्वों, प्रश्नों के महत्त्व और सत्य के विषय पर मानव-जाति की विकसित होती समझ के बारे में विस्तृत चर्चा की गई है। साथ ही विशेष रूप से परमाणुवाद पर भी चर्चा की गई है जिसके अंतर्गत ब्रह्मांड महर्षि कपिल के सांख्य दर्शन और महर्षि पतंजलि के योग दर्शन के अनुसार पाँच महाभूत तत्वों तथा महर्षि कणाद के वैशेषिक दर्शन के अनुसार चार महाभूत तत्वों (अंतरिक्ष को शामिल नहीं किया गया है) से मिलकर बना है। चूँकि विज्ञान मूल रूप से एकरूपता खोजता है, इसलिए पुस्तक के आवरण के अगले भाग में आग और अंतरिक्ष को चक्रीय क्रम (cyclic order) में दर्शाया गया है, जो अक्रिय और सक्रिय दोनों एकरूपताओं द्वारा मानव मन की जिज्ञासा और उसके लिए किये गए मानव-जाति के प्रयासों की परिधि को दर्शाता है। पृष्ठभूमि में एब्स्ट्रैक्ट गति का परिचायक है - यह हमारी वैज्ञानिक यात्रा और उसकी उद्देश्य पूर्ति को दर्शा रहा है। जिसकी चर्चा अरस्तू, बर्ट्राण्ड रसेल, अल्बर्ट आइंस्टाइन, स्टीवन वेनबर्ग, थॉमस कुह्न तथा स्टीफेन हॉकिंग ने की है।

पुस्तक के आवरण के पिछले भाग से :

आग ने प्रकृति का बोध कराया।
भाषा ने प्रश्नों को शब्द दिए हैं।
गणित ने मनुष्य को संशयवादी बनाया।
प्रयोग ने निर्णायक समाधान दिए हैं।
दर्शन ने अज्ञानता का बोध कराया।
विज्ञान ने वस्तुनिष्ठ उत्तर दिए हैं।
धर्म ने जीवन मूल्यों को स्थापित किया।
कला ने संभावनाओं को स्वरूप प्रदान किये हैं।
तकनीक ने वैकल्पिक समाधान-साधन सुझाए।
अंतरिक्ष ने समानता और स्वतंत्रता के अवसर दिए हैं।

यद्यपि यह सच है कि इसके बाद भी मानव-जाति के अब तक के सम्पूर्ण इतिहास में आपसी अविश्वास, निर्भरता और नीरसता निरंतर बढ़ी दिखाई देती है।

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